Surah yaseen in hindi | tarjuma & fazilat hindi/urdu & english me

Surah Yaseen : दोस्तों इस पोस्ट में आप जानेंगे सूरह यासीन इन हिन्दी (Surah Yaseen In Hindi) के बारे में और इसका Hindi & Urdu Tarjuma साथ ही इसकी फजीलत (Benefits) भी आप जानेंगे ।


प्यारे इस्लामी भाईयों और बहनों - अस्सलामुअलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू


दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं सूरह यासीन के बारे में । युँ तो लगभग सभी मुसलमानों को यह पता होता है कि सूरह यासीन कुरान शरीफ की एक बेहद मुफीद सूरह है, लेकिन बहुत से लोगों को सूरह यासीन और इसका मतलब याद नहीं है ।


तो आज हम आपको इसी (सूरह यासीन) के बारे में बताने वाले हैं । आप इस पोस्ट को आखिर तक जरूर पढ़िएगा । ताकि कोई भी प्वांईंट न छूटे और आप सूरह यासीन सही से सीख जाँए ।



इस पोस्ट को कम से कम अपने 10 रिश्तेदारों या दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें । इंशाअल्लाह अल्लाह तआला आपको इसका सवाब दुनिया और आखिरत दोनों में देगा ।


सूरह यासीन हिन्दी में | Surah Yaseen In Hindi


Surah Yaseen In Hindi

🌷بِسْمِ اَللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْم🌷


  1. यासीन
  2. वल कुर-आनिल हकीम
  3. इन्नका लमिनल-मुरसलीन
  4. अला-सिरातिम मुस्तकीम
  5. तनजीलल अजीज़िर-रहीम
  6. लितुन ज़िरा-कौमम मा उनज़िरा आबाउहुम-फहुम गाफिलून
  7. लकद हक-कल कौलु अला अकसरिहिम फहुम ला युअ’मिनून
  8. इन्ना जअल्ना फी अअ’ना किहिम अगलालन-फहिया इलल अजक़ानि फहुम मुक़महून
  9. व जअल्ना मिम बैनि ऐदी-हिम सद्दव वमिन खलफिहिम सद्दन फअग शैनाहुम फहुम ला युबसिरून
  10. वसवाउन अलैहिम अअनजर तहुम अम-लम-तुनजिरहुम ला युअ’मिनून
  11. इन्नमा तुन्ज़िरू मनित तब अज़-ज़िकरा व खशियर रहमान बिल्गैब फबश्शिर हु बिमग फिरतिव व अजरिन करीम
  12. इन्ना नहनु नुहयिल मौता वनकतुबु मा क़द्दमु व आसारहुम वकुल्ला शयइन-अहसैनाहु फी इमामिम मुबीन
  13. वज़-रिब लहुम मसलन असहाबल करयह इज़ जा अहल मुरसलून
  14. इज़ अरसलना इलयहिमुस नैनि फकज़ जबूहुमा फ-अज़ ज़ज्ना बिसा लिसिन फकालू इन्ना इलैकुम मुरसलून
  15. कालू मा अन्तुम इल्ला बशरुम मिसलूूना वमा-अनजलर रहमानु मिन शय इन इन अन्तुम इल्ला तकज़िबुन
  16. कालू रब्बुना यअ’लमु इन्ना इलैकुम लमुरसलून
  17. वमा अलैना इल्लल बलागुल मुबीन
  18. कालू इन्ना ततैयरना बिकुम लइल लम तनतहू लनरजु मन्नकूम वला यमस सन्नकुम मिन्ना अज़ाबुन-अलीम
  19. कालू ताइरुकुम म अकुम अइन ज़ुक्किरतुम बल अन्तुम क़ौमूम मुस-रिफून
  20. व जा अमिन अक्सल मदीनति रजुलुय यसआ काला या कौमित-त्तबिउल मुरसलीन
  21. इत तबिऊ मल-ला यस अलुकुम अजरौ वहुम मुहतदून
  22. वमालिया ला अअ’बुदुल-लज़ी फतरनी व इलैहि तुरजऊन
  23. अ अत्तखिज़ु मिन दुनिही आलिहतन इय-युरिदनिर रहमानु बिजुर रिल ला तुगनि अन्नी शफ़ा अतुहुम शय अव वला यूनकिजून
  24. इन्नी इज़ल लफी ज़लालिम मुबीन
  25. इन्नी आमन्तु बिरब बिकुम फसमऊन
  26. कीलद खुलिल जन्नह काल यालैत क़ौमिय यअ’लमून
  27. बिमा गफरली रब्बी व जअलनी मिनल मुकरमीन
  28. वमा अन्ज़लना अला क़ौमिही मिन बअ’दिही मिन जुन्दिम मिनस समाइ वमा कुन्ना मुनजलीन
  29. इन कानत इल्ला सैहतौ वाहिदतन फइज़ा हुम् खामिदून
  30. या हसरतन अलल इबाद मा यअ’तीहिम मिर रसूलिन इल्ला कानू बिही यस तहज़िउन
  31. अलम यरौ कम अहलकना क़ब्लहुम मिनल कुरूनि अन्नहुम इलैहिम ला यर जिउन
  32. वइन कुल्लुल लम्मा जमीउल लदैना मुह्ज़रून
  33. व आयतुल लहुमूल अरज़ुल मैतह अह ययनाहा व अखरजना मिन्हा हब्बन फमिनहु यअ कुलून
  34. व जअलना फीहा जन्नातिम मिन नखीलिव व अअ’नाबिव व फज्जरना फीहा मिनल उयून
  35. लियअ’ कुलु मिन समरिही वमा अमिलत हु अयदीहिम अफला यशकुरून
  36. सुब्हानल लज़ी ख़लक़ल अज़वाज कुल्लहा मिम मा तुमबितुल अरज़ू वमिन अनफुसिहिम वमिम मा ला यअलमून
  37. व आयतुल लहुमूल लैल नसलखु मिन्हुन नहारा फइज़ा हुम् मुजलिमून
  38. वश शमसु तजरि लिमुस्त कररिल लहा ज़ालिका तक़्दी रूल अज़ीज़िल अलीम
  39. वल कमर कद्दरनाहु मनाज़िला हत्ता आद कल उरजुनिल क़दीम
  40. लश शम्सु यमबगी लहा अन तुद रिकल कमरा वलल लैलु साबिकुन नहार वकुल्लुन फी फलकिय यसबहून
  41. व आयतुल लहुम अन्ना हमलना ज़ुररिय यतहूम फिल फुल्किल मशहून
  42. व खलकना लहुम मिम मिस्लिही मा यरकबून
  43. व इन नशअ नुगरिक हुम फला सरीखा लहुम वाला हुम युन्क़जून
  44. इल्ला रहमतम मिन्ना व मताअन इलाहीन
  45. व इजा कीला लहुमुत तकू मा बैना ऐदीकुम वमा खल्फकुम लअल्लकुम तुरहमून
  46. वमा तअ’तीहिम मिन आयतिम मिन आयाति रब्बिहिम इल्ला कानू अन्हा मुअ रिजीन
  47. व इज़ा कीला लहुम अन्फिकू मिम्मा रजका कुमुल लाहु क़ालल लज़ीना कफरू लिल लज़ीना आमनू अनुत इमू मल लौ यशाऊल लाहू अत-अमह इन अन्तुम इल्ला फ़ी ज़लालिम मुबीन
  48. व यकूलूना मता हाज़ल व’अदू इन कुनतुम सादिक़ीन
  49. मा यन ज़ुरूना इल्ला सैहतव व़ाहिदतन तअ खुज़ुहुम वहुम यखिस-सिमून
  50. फला यस्ता तीऊना तौ सियतव वला इला अहलिहिम यरजिऊन
  51. व नुफ़िखा फिस सूरि फ़इज़ा हुम मिनल अज्दासि इला रब्बिहिम यन्सिलून
  52. कालू या वय्लना मम ब असना मिम मरक़दिना हाज़ा मा व अदर रहमानु व सदकल मुरसलून
  53. इन कानत इल्ला सयहतव वहिदतन फ़ इज़ा हुम जमीउल लदैना मुहज़रून
  54. फल यौम ला तुज्लमु नफ्सून शय अव वला तुज्ज़व्ना इल्ला बिमा कुंतुम तअ’लमून
  55. इन्न अस हाबल जन्न्तिल यौमा फ़ी शुगुलिन फाकिहून
  56. हुम व अज्वा जुहूम फ़ी ज़िलालिन अलल अराइकि मुत्तकिऊन
  57. लहुम फ़ीहा फाकिहतुव वलहुम मा यद् दऊन
  58. सलामुन कौलम मिर रब्बिर रहीम
  59. वम ताज़ुल यौमा अय्युहल मुजरिमून
  60. अलम अअ’हद इलैकुम या बनी आदम अल्ला तअ’बुदुश शैतान इन्नहू लकुम अदुववुम मुबीन
  61. व अनिअ बुदूनी हज़ा सिरातुम मुस्तक़ीम
  62. व लक़द अज़ल्ला मिन्कुम जिबिल्लन कसीरा अफलम तकूनू तअकिलून
  63. हाज़िही जहन्नमुल लती कुन्तुम तूअदून
  64. इस्लौहल यौमा बिमा कुन्तुम तक्फुरून
  65. अल यौमा नाख्तिमु अल अफ्वा हिहिम व तुकल लिमुना अयदीहिम व तशहदू अरजु लुहुम बिमा कानू यक्सिबून
  66. व लौ नशाउ लता मसना अला अअ’युनिहिम फ़स तबकुस सिराता फ अन्ना युबसिरून
  67. व लौ नशाउ ल मसखना हुम अला मका नतिहिम फमस तताऊ मुजिय यौ वला यर-जिऊन
  68. वमन नुअम मिरहु नुनक किसहु फिल खल्क अफला यअ’ किलून
  69. वमा अल्लम नाहुश शिअ’रा वमा यम्बगी लह इन हुवा इल्ला जिक रुव वकुर आनुम मुबीन
  70. लियुन जिरा मन काना हय्यव व यहिक क़ल कौलु अलल काफ़िरीन
  71. अव लम यरव अन्ना खलक्ना लहुम मिम्मा अमिलत अय्दीना अन आमन फहुम लहा मालिकून
  72. व ज़ल लल नाहा लहुम फ मिन्हा रकू बुहुम व मिन्हा यअ’कुलून
  73. व लहुम फ़ीहा मनाफ़िउ व मशारिबु अफला यश्कुरून
  74. वत तखजू मिन दूनिल लाहि आलिहतल लअल्लहुम युन्सरून
  75. ला यस्ता तीऊना नस रहुम वहुम लहुम जुन्दुम मुह्ज़रून
  76. फला यह्ज़ुन्का क़व्लुहुम इन्ना नअ’लमु मा युसिर रूना वमा युअ’लिनून
  77. अव लम यरल इंसानु अन्ना खलक्नाहू मिन नुत्फ़तिन फ़ इज़ा हुवा खासीमुम मुबीन
  78. व ज़रबा लना मसलव व नसिया खल्कह काला मय युहयिल इजामा व हिय रमीम
  79. कुल युहयीहल लज़ी अनश अहा अव्वला मर्रह वहुवा बिकुलली खल किन अलीम
  80. अल्लज़ी जअला लकुम मिनश शजरिल अख्ज़रि नारन फ़ इज़ा अन्तुम मिन्हु तूकिदून
  81. अवा लैसल लज़ी खलक़स समावाती वल अरज़ा बिक़ादिरिन अला य यख्लुक़ा मिस्लहुम बला वहुवल खल्लाकुल अलीम
  82. इन्नमा अमरुहू इज़ा अरादा शय अन अय यकूला लहू कुन फयकून
  83. फसुब हानल लज़ी बियदिही मलकूतु कुल्ली शय इव व इलैहि तुरज उन

अल्लाह हम सबको सूरह यासीन पढ़ने की तौफीक अता फरमाए | खुद भी पढ़ें और दूसरों को भी पढ़ाएँ


Surah Yaseen Tarjuma in Hindi


Surah Yaseen in Urdu


  1. यासीन (Yaseen) ।
  2. क़ुराने हकीम की क़सम ।
  3. इस में कोई शक नहीं कि आप अल्लाह के पैगम्बरों में से हैं ।
  4. सीधे रस्ते पर हैं ।
  5. ये कुरान उस ज़ात की तरफ से उतारा जा रहा है जो ज़बरदस्त भी है रहम फरमाने वाला भी है।
  6. ताकि आप उस कौम को ख़बरदार कर दें जिन के बाप दादा को ख़बरदार नहीं किया गया वो ग़फलत में पड़े हुए थे  ।
  7. हक़ीक़त ये है कि उन में से अक्सर लोगों के बारे में बात पूरी हो चुकी है इसलिए वो ईमान नहीं लाते
  8. हम ने उनकी गर्दनों में तौक डाल रखे हैं फिर वो थोडियों तक हैं तो उनके सर अकड़े पड़े हैं ।
  9. और हम ने एक आड़ उनके आगे खड़ी कर दी है और एक आड़ उनके पीछे खड़ी कर दी है और इसी तरह उन्हें हर तरफ से ढांक लिया है इसलिए उन्हें कुछ सुझाई नहीं देता ।
  10. उनके लिए दोनों बातें बराबर हैं चाहे तुम उन्हें ख़बरदार करो या ख़बरदार न करो वो ईमान नहीं लायेंगे ।
  11. तुम तो सिर्फ ऐसे शख्स को ख़बरदार कर सकते हो जो नसीहत पर चले और खुदाए रहमान को देखे बगैर उस से डरे, चुनान्चे ऐसे शख्स को तुम मगफिरत और बा इज्ज़त अज्र की खुशखबरी सुना दो ।
  12. यक़ीनन हम ही मुर्दों को जिंदा करेंगे, और जो कुछ अमल उन्होंने आगे भेजे हैं हम उनको भी लिखते जाते हैं और उनके कामों के जो असरात हैं उनको भी और हर चीज़ एक खुली किताब में हम ने गिन गिन कर रखी है ।
  13. और आप उनके सामने गाँव वालों की मिसाल दीजिये जब रसूल उनके पास पहुंचे थे
  14. जब हम ने उनके पास (शुरू में) दो रसूल भेजे तो उन्होंने दोनों को झुठलाया तो हम ने तीसरे के ज़रिये उनको क़ुव्वत दी तो उन सब ने कहा हम को तुम्हारी तरफ़ रसूल बना कर भेजा गया है ।
  15. वो लोग कहने लगे : तुम तो हमारे ही जैसे इंसान हो, खुदाए रहमान ने कोई चीज़ उतारी नहीं है तुम लोग सरासर झूठ बोल रहे हो ।
  16. उन रसूलों ने कहा : हमारा परवरदिगार खूब जानता है कि हमें वाक़ई तुम्हारे पास रसूल बना कर भेजा गया है ।
  17. और हमारी ज़िम्मेदारी तो सिर्फ इतनी है कि साफ़ साफ़ पैग़ाम पहुंचा दें ।
  18. बस्ती वालों ने कहा : हम तो तुम लोगों को मनहूस समझते हैं, अगर तुम बाज़ न आये तो हम तुमको पत्थर मार मार कर हलाक कर देंगे और हमारी जानिब से तुम को दर्दनाक तकलीफ़ पहुंचेगी ।
  19. रसूलों ने कहा : तुम्हारी नहूसत खुद तुम्हारे साथ लगी हुई है, क्या ये बातें इस लिए कर रहे हो कि तुम्हें नसीहत की बात पहुंचाई गयी है ? असल बात ये है कि तुम खुद हद से गुज़रे हुए लोग हो।
  20. और शहर के किनारे से एक आदमी दौड़ता हुआ आया बोला, ए मेरी कौम रसूलों का कहा मान लो ।
  21. उन लोगों का कहा मान लो जो तुम से कोई उजरत नहीं मांग रहे, और सही रास्ते पर हैं ।
  22. आखिर मैं क्यूँ उस ज़ात की इबादत न करूं, जिस ने मुझे पैदा फ़रमाया, और उसी की तरफ तुम सब लौटाए जाओगे ।
  23. क्या मैं उसके अलावा ऐसे माबूद बना लूं कि अगर रहमान मुझे नुकसान पहुँचाने का इरादा कर ले तो न उनकी सिफ़ारिश मेरे कुछ काम आ सकेगी और न वो मुझे बचा सकेंगे
  24. अगर मैंने ऐसा किया तो मैं खुली हुई गुमराही में जा पडूँगा ।
  25. मैं तो तुम्हारे रब पर ईमान ला चुका हूं इसलिए मेरी बात सुन लो ।
  26. (मगर जो लोग कुफ्र पर अड़े हुए थे उन्होंने उस ईमान लाने वाले को शहीद कर दिया चुनांचे खुदा की तरफ से) उसको हुक्म फरमाया गया कि तुम जन्नत में दाखिल हो जाओ (वह कहने लगे) काश ! मेरी कौम को यह बात मालूम हो जाती ।
  27. कि मेरे रब ने मुझे माफ कर दिया है और मुझको बा इज्ज़त बन्दों में शामिल फरमा लिया है ।
  28. हमने उसके बाद उसकी कौम पर आसमान से कोई लश्कर नहीं भेजा और ना हमें इसकी जरूरत थी ।
  29. वह तो सिर्फ एक सख्त आवाज थी, फिर उसी लम्हे वह सब बुझ कर रह गए ।
  30. अफसोस मेरे उन बंदों पर कि जब उनके पास कोई रसूल आता तो वह उसका मजाक उड़ाते।
  31. क्या उन्होंने गौर नहीं किया कि हमने उनसे पहले कितनी नस्लों को हलाक कर दिया वह उनके पास वापस नहीं आ सकते ।
  32. और यकीनन सब के सब हमारे पास हाजिर कर दिए जाएंगे और
  33. उनके लिए एक निशानी यह बंजर जमीन भी है हमने उसको जिंदा कर दिया और उसमें से अनाज निकाला तो वह उससे खाते हैं ।
  34. और हमने उसमें खजूरों और अंगूरों के बागात पैदा किये और उस ज़मीन में चश्मे जारी कर दिए
  35. ताकि लोग उसके फल खाएं और ये फ़ल उनके हाथों के बनाये हुए नहीं हैं, फिर भी वह ऐसा नहीं मानते ।
  36. अल्लाह की ज़ात पाक है जिसने सबके जोड़े पैदा किए जमीन की पैदावार में भी और खुद इंसानों में और कितनी ऐसी चीजों में जिसको वह जानते ही नहीं ।
  37. और उनके लिए एक निशानी रात भी है दिन को हम उससे हटा लेते हैं बस वह यकायक अंधेरे में रह जाते हैं ।
  38. और सूरज अपने ठिकाने की तरफ चला जा रहा है, यह उस जात का मुकर्रर किया हुआ (निजाम) है जो बेहद ताकतवर और बड़ा ही बाखबर है ।
  39. चांद के लिए भी हमने मंजिलें मुकर्रर कर दी यहां तक कि वह सूखी हुई पुरानी टहनी की तरह हो जाता है ।
  40. ना सूरज की मजाल है कि वह चांद को आ पकड़े और ना रात दिन से पहले आ सकती है, सब के सब एक मदार में तैर रहे हैं ।
  41. उनके लिए एक निशानी यह भी है कि हमने उनकी नस्ल को भरी हुई कश्ती में सवार कर लिया
  42. और हमने उनके लिए कश्ती की तरह की और चीजें भी पैदा की हैं जिन पर वह सवार होते हैं
  43. और अगर हम चाहे तो उनको गर्क़ कर (डुबो) दें फिर ना उनकी फरियाद पर कोई पहुंचने वाला हो और ना वह निकाले जा सकें ।
  44. मगर यह सिर्फ हमारी मेहरबानी है और एक वक्त तक के लिए फायदा मुहैया करना है
  45. और जब उनसे कहा जाता है ( अज़ाब ) से डरो, जो तुम्हारे सामने और पीछे हैं, तो शायद तुम पर रहम किया जाए (तो वह उसकी कोई परवाह नहीं करते)
  46. और जब भी उनके पास उनके परवरदिगार की निशानियां में से कोई निशानी आती है तो वह उसे मुंह फेर लेते हैं
  47. और जब उनसे कहा जाता है कि अल्लाह तआला ने तुमको जो कुछ अता फ़रमाया है उसमें से खर्च करो तो ईमान न लाने वाले मुसलमानों से कहते हैं : क्या हम उन लोगों को खिलाएं, जिन को खिलाना अल्लाह को मंजूर होता तो खुद ही खिला देते ? तुम लोग खुली हुई गुमराही में पड़े हुए हो
  48. और वह लोग कहते हैं अगर तुम सच्चे हो (तो बताओ कि) यह वादा कब पूरा होगा ?
  49. वह लोग बस एक सख्त आवाज़ का इंतजार कर रहे हैं, जो उनको इस हालत में आ पकड़ेगी कि वह लड़ झगड़ रहे होंगे
  50. फिर ना तो वह कोई वसीयत कर सकेंगे और ना अपने घरवालों की तरफ जा सकेंगे
  51. और सूर फूंका जाएगा तो वह सब क़बरों से निकलकर अपने परवरदिगार की तरफ दौड़ पड़ेंगे
  52. कहेंगे : हाय हमारी बदनसीबी हमको हमारी क़बरों से किस ने उठा दिया ? यही है वह वाकिया जिसका बेहद मेहरबान (खुदा) ने वादा फरमाया था, और अल्लाह के पैग़म्बरों ने सच ही कहा था
  53. बस यह एक सख्त आवाज होगी, फिर एक ही दम सब के सब हमारे सामने हाजिर कर दिए जाएंगे
  54. फिर उस दिन किसी शख्स के साथ जरा भी नाइंसाफी नहीं होगी और तुमको तुम्हारे आमाल का पूरा पूरा बदला दिया जाएगा
  55. यक़ीनन जन्नत वाले लोग उस दिन मज़े उड़ाने में लगे होंगे
  56. वह और उनकी बीवियां साये में टेक लगाए हुए मसेहरियों पर बैठे होंगे
  57. उनके लिए जन्नत में मेवे भी होंगे और वह सारी चीजें भी जो वह मांगेंगे
  58. (सबसे अहम् इनाम यह है कि) उनको मेहरबान परवरदिगार की तरफ से सलाम फरमाया जाएगा
  59. और ( अल्लाह तआला फरमाएंगे :) ए गुनहगारों ! आज तुम अलग हो जाओ
  60. ऐ आदम की औलाद ! क्या मैंने तुमको ताकीद नहीं की थी कि तुम शैतान की इबादत न करो कि वह तुम्हारा खुला हुआ दुश्मन है
  61. और यह कि तुम मेरी ही इबादत करना यही सीधा रस्ता है
  62. और शैतान तो तुम में से बहुत से लोगों को गुमराह कर चुका है तो क्या तुम अक्ल नहीं रखते थे ?
  63. यही वह दोजख़ ( जहन्नम ) है जिससे तुम्हें डराया जा रहा था
  64. आज अपने कुफ्र करने की वजह से उस में दाखिल हो जाओ
  65. आज हम उनके मुंह पर मुहर लगा देंगे, और उनकी हरकतों के बारे में उनके हाथ हम से बात करेंगे और उनके पांव गवाही देंगे
  66. अगर हम चाहें तो उनकी आंखों को सपाट कर दें, फिर यह रास्ते की तरफ दौड़ें, तो कहां देख पाएंगे ?
  67. और अगर हम चाहें तो उनकी अपनी जगह पर बैठे बैठे उनकी सूरतें इस तरह मस्ख कर दें कि यह न आगे बढ़ सकें और न पीछे लौट सकें
  68. जिस शख्स को हम लंबी उम्र देते हैं उसकी पैदाइश को उलट देते हैं फिर भी क्या वो अक्ल से काम नहीं लेते
  69. और हम ने (अपने) उन (पैगंबर) को ना शायरी सिखाई है, और ना यह बात उनके शायाने शान है यह तो बस एक नसीहत की बात है और ऐसा कुरान जो हक़ीक़त खोल खोल कर बयान करता है
  70. ताकि ऐसे शख्स को खबरदार कर दें जो (क़ल्ब और रूह के एतबार से) जिंदा हो और ताकि ईमान लाने वालों पर हुज्जत पूरी हो जाए
  71. क्या उन्होंने देखा नहीं कि जो चीजें हमने अपने हाथों से बनाई हैं उनमें से यह भी है कि हमने उनके लिए चौपाये पैदा कर दिए और ये उनके मालिक बने हुए हैं
  72. और हमने उन चौपायों को उनके काबू में कर दिया है चुनांचे उनमें से कुछ वो हैं जो उनकी सवारी बने हुए हैं और कुछ वो हैं जिन्हें ये खाते हैं
  73. उनको उन चौपायों से और भी फ़ायदे हासिल होते हैं और जानवरों में पीने की चीजें भी है तो क्या फिर भी यह शुक्र अदा नहीं करते
  74. उन लोगों ने अल्लाह के सिवा दूसरे माबूद बना लिए हैं कि शायद उनकी मदद की जाए
  75. (हालाँकि) उन में ये ताक़त ही नहीं है कि वह उनकी मदद कर सकें, बल्कि वो उन के लिए एक ऐसा (मुख़ालिफ़) लश्कर बनेंगे जिसे (क़यामत में उनके सामने) हाज़िर कर लिया जायेगा
  76. आप उनकी बातों से ग़मगीन ना हों, वह जो कुछ छुपाते हैं और जो कुछ जाहिर करते हैं वह सब हमें मालूम है
  77. क्या इंसान ने गौर नहीं किया कि हमने तो उसको नुत्फे से पैदा किया, फिर वह खुला हुआ झगड़ालू हो गया ?
  78. वह हमारे लिए मिसालें बयान करने लगा और अपनी पैदाइश को भूल गया, वह कहने लगा : जो हड्डियां गल चुकी है, उनको (दोबारा) कौन जिंदा करेगा
  79. आप कह दीजिए : वही जिंदा करेगा जिसने उसको पहली दफा पैदा किया था और वह सब (चीजों को) पैदा करना जानता है
  80. जिस ने तुम्हारे लिए सब्ज़ दरख़्त से आग पैदा कर दी है फिर तुम उससे (आग) सुलगाते हो
  81. क्या वह ज़ात जिसने आसमानों को और जमीन को पैदा किया है, इन (इंसानों) के जैसा पैदा नहीं कर सकती ? क्यों नहीं ? वह जरूर पैदा कर सकता है, वह खूब पैदा करने वाला और खूब जानने वाला है
  82. उसकी शान यह है कि जब वह किसी चीज का इरादा करता है तो उसको हुक्म फरमाता है हो जा, तो वह हो जाती है
  83. गर्ज़ कि वो ज़ात पाक है जिसके हाथों में हर चीज की हुकूमत है और उसी की तरफ तुम को लौट कर जाना है ।

Surah Yaseen in English


Surah Yaseen in English


जो Surah Yaseen sharif in English में पढ़ना चाहते हैं या जिन लोगो को हिन्दी में परेशानी होती है वो लोग भी सुरह यासीन शरीफ को समझ सके और सूरह यासीन शरीफ की फ़ज़ीलत के बारे में ज्यादा से जाने सके इसीलिए हमने Surah Yaseen को English में भी लिखा है ।

Bismillahir Rahmanir Raheem

  1. Yaseen
  2. Wal Quraanil Hakeem
  3. Innaka Laminal Mursaleen
  4. Ala Siratim Mustaqeem
  5. Tanzeelal Azizir Raheem
  6. Litunzira Qaumam Ma Unzira Aabauhum Fahum Ghafiloon
  7. Laqad Haqqal Qaulu Ala Aksarihim Fahum La Uaminoon
  8. Inna Ja'Alna Fi Aanaqihim Aglalan Fahiya IlalAzqani Fahum Muqmahoon
  9. Wajalna Mim Bayni Aydihim Saddaw Wamin Khlfihim Saddan Fa Agshay Nahum Fahum La Yubsiroon
  10. Wasa Waun Alayhim A Anzar Tahum Am Lam Tunzirhum La Yuaminoon
  11. Innama Tunziru Manit Taba Azzikra Wa Khashiyar Rahmana Bilghaybi Fabash shirhu Bimagh Firatiw Waajrun Kareem
  12. Inna Nuhyil Mauta Wanaktubu Ma Qaddamu Wa Aasa rahum Wakulla Shay in Ahsaynahu Fi Imamim Mubeen
  13. Wazrib Lahum Masalan As habal Qaryah Iz Ja Ahal Mursaloon
  14. Iz Arsalna Ilayhimus Naini Fakaz Zaboohuma Fa Az Zazna Bisalisin Faqalu Inna Ilikum Mursaloon
  15. Qaloo Maa Antum Illa Basharum Misluna Wama Anzalar Rahmanu Min Shay in In Antum IllaTakziboon
  16. Qaloo Rabbuna Yaalamu Inna Ilaykum Lamur saloon
  17. Wama Alayna Illal Balaghul Mubeen
  18. Qalu Inna Tatay yarna Bikum Lail Lam Tantahu Lanarju Man Nakum Wala Yamas San Nakum Minna Azabun Aleem
  19. Qaloo Taairukum Ma Akum Ain Zukkirtum Bal Antum Qaumum Musrifoon
  20. Waja Amin Aqsal Madeenati Rajuluy Yasaa Qala Ya Qaumit Tabi Ul Mursaleen
  21. It Tabiu Mal La Yas alukum Ajraw Wahum Muhtadoon
  22. Wamaliya La Aabudul Lazi Fatarani Wailaihi Turjaoon
  23. A Atakhizu Min Doonihi Aalihatan Iy Yuridnir Rahmanu Bizurril La Tughni Ani Shafa Atuhum Shayaw Wala Yunqizoon
  24. Inni Izal Lafi Zalalim Mubeen
  25. Inni Amantu Birabbikum Fasmaoon
  26. Qeelad Khulil Jannah Qala Yalayta Qawmiy ya Alamoon
  27. Bima Ghafarali Rabbi Wa Ja Alani Minal Mukramin
  28. Wama Anzalna Ala Qaumihi Mim Badihi Min Jundim Minas Samai Wama Kunna Munzilin
  29. In Kanat Illa Say hataw Wahidatan Faiza Hum Khamidoon
  30. Ya Hasratan Alal Ibaad Maa Ya Teehim Mir Rasoolin Illa Kanu Bihi Yastah Zioon
  31. Alam Yarau Kam Ahlakna Qablahum Minal Qurooni Annahum Ilayhim La Yarjioon
  32. Wa in Kullul Lamma Jameeul Ladayna Muhzaroon
  33. Wayatul Lahumul Arzul Maytah Ahyaynaha Wa Akhrajna Minha Habban Faminhu Yakuloon
  34. Wa ja Alna Feeha Jannatim Min Nakheeliw WaAnabiw Wafaj jarna Feeha Minal Uyoon
  35. Liya Kuloo Min Samarihi Wama Amilathu Aydeehim Afala Yashkuroon
  36. Subhanal Lazi Khalaqal Azwaja Kul Laha Mimma Tumbitul Arzu Wamin Anfusihim Wamimma La Yalamoon
  37. Wa Ayatul Lahumul Layl Naslakhu Minhun Nahara Fa Iza Hum Muzlimoon
  38. Wash Shamsu Tajree Limusta Qarril Laha Zalika Taqdeerul Azizil Aleem
  39. Wal qamara Qaddar Nahu Manazila Hatta Aada Kal urjoonil Qadeem
  40. Lash Shamsu Yambaghi Laha An Tudrikal Qamara Walal Laylu Sabiqun Nahaar Wakullun Fee Falakiy Yasbahoon
  41. Waayatul Lahum Anna Hamalna Zurriyyatahum Fil Fulkil Mash Hooon
  42. Wakhalaqna Lahum Mim Mislihi Ma Yarkaboon
  43. Wain Nasha Nugrikhum Fala Sareekha Lahum Wala Hum Yunqazoon
  44. Illa Rahmatam Minna Wamata An Ilahin
  45. Wa iza Qeela Lahumut Taqu Ma Bayna Aydeekum Wama Khalfakum Laallakum Turhamoon
  46. Wama Ta Teehim Min Aayatim Min Aayati Rabbihim Illa Kanu Anha Mu a Rezeen
  47. Wa iza Qeela Lahum Anfiqu Mimma Razaqa Kumullah Qalal Lazina Kafaru Lillazina Aamanu Anutimu Mal Lau Yashau Lahu Atamah InAntum Illa Fi Zalalim Mubeen
  48. Wa Yaqoo loona Mata Hazal Wa Adu In Kuntum Sadiqeen
  49. Ma Yanzuruna Illa Sayhataw Wahidatan Ta Khuzuhum Wahum Yakhis Simoon
  50. Fala Yasta Teeuna Tawsiyatw Wala Ila Ahlihim Yarjioon
  51. Wa Nufikha Fis Soori Fa Iza Hum Minal Ajdasi Ila Rabbihim Yan siloon
  52. Qaloo Yawailana Mam Ba Asana Mim Marqadina Haza Ma Wa Adar Rahmanu Wa sadaqal Mursaloon
  53. In Kanat Illa Sayhataw Wahidatan Faiza hum Jameeul Ladayna Muhzaroon
  54. Falyauma Tuzlamu Nafsun Shay Aw Wala Tujzauna Illa Ma Kuntum Ta’maloon
  55. Inna As habal Jannatil Yauma Fi Shugulin Fakihun
  56. Hum Wa Azwaju hum Fi Zilalin Alal Araiki Mutta kioon
  57. Lahum Feeha Fakihataw Walahum Ma YadDaoon
  58. Salamun Qaulam Mir Rabbir Raheem
  59. Wamtazul Yauma Ayyuhal Mujrimoon
  60. Alam Aahad IlaikumYa Bani Aadama Al La Tabudush Shaytaan Innahu Lakum Adwwum Mubeen
  61. Wa Ania Budooni Haza Siratum Mustaqeem
  62. Wa laqad Azalla Minkum JibilLan Kaseera Afalam Takoonu Taaqiloon
  63. Hazihi Jahannamul Lati Kuntum Tooadoon
  64. Islauhal Yauma Bima Kuntum Takfuroon
  65. Alyauma Nakhtimu Ala Afwa hihim Watukal limuna Aydeehim Watash Hadu Arjuluhum Bima Kanu Yaksiboon
  66. Walau Nashau Latamasna Ala Aayunihim Fastabaqus Sirata Fanna Yubsiroon
  67. Walau Nashau Lamasakhna Ala Makanatihim Famastatau Muziyyaw Wala Yarjioon
  68. Waman Nuammirhu Nunakkishu Fil Khalq Afala Yaqiloon
  69. Wama Allamnahush Shira Wama Yambagi Lah In Hua Illa Zikruw Wa quraanim Mubeen
  70. Liyunzira Man Kana Hayyaw Wayahiqqal Qaulu Alal Kafireen
  71. Awalam Yarau Anna Khalaqna Lahum Mimma Amilat Aydina An aaman Fahum Laha Malikoon
  72. Wazallal Naha Lahum Faminha Rakoobahum Waminha Yakuloon
  73. Walahum Fiha Manafiu Wa Masharibu Afala Yashkuroon
  74. Wat Takhazu Min Dunil Lahi Alihatal La Allahum Yunsaroon
  75. La Yastatioona Nasrahum Wahum Lahum Jundum Muhzaroon
  76. Fala Yahzunka Qauluhum Inna Na Lamu Wama Yusirroona Wama Yualinoon
  77. Awalam YaralInsanu Inna Khalaqnahu Min Nutfatin Faiza Huwa Khaseemum Mubeen
  78. Wazaraba Lana Masalaw Wanasiya Khalqah Qala May Yuhyil Izama Wahiya Rameem
  79. Qul Yuhyihal Lazi Ansha Aha Awwala Marrah Wahua Bikulli Khalqin Aleem
  80. Allazi Ja Ala Lakum Minash Shajaril Akhzari Naran Faiza Antum Minhu Tooqidoon
  81. Awa laisal Lazi Khalaqas Samawati Wal Arza Biqadirin Ala Ayyakhluqa Mislahum Bala Wahua Khallaqul Aleem
  82. Innama Amruhu Iza Arada Shayan Ay Yaqoola Lahu Kun Fayakoon
  83. Fasubhanal Lazi Biyadihi Malakootu Kulli Shayiw WaIlyhi Turjaoon.


सूरह यासीन पढ़ने की फजीलत (Benefits)



Surah Yaseen ki Fazilat in hindi/urdu

मरने वाले के पास सूरह यासीन का पढ़ना

मरने वाले के पास नज़ा की हालत यानी जब उसके आखिरी साँसें लेने के वक़्त सूरह यासीन पढ़ना सुन्नत है | सूरह यासीन से सकरात की तकलीफ और आसान हो जाती है ।


खाने में बरकत के लिए सूरह यासीन का पढ़ना

शादी और दूसरी दावतों के मौके पर खाने में बरकत के लिए सूरह यासीन पढ़ना बहुत मुजर्रब है ।


बच्चे की पैदाइश के वक़्त सूरह यासीन का पढ़ना

बच्चे की पैदाइश के वक़्त होने वाला दर्द (दर्द-ए-ज़ेह) के दौरान सूरह यासीन को तीन बार पानी पर दम करके माँ को पिलाने से विलादत में आसानी होती है ।


बादशाह या दुश्मन का खौफ हो तो सूरह यासीन का पढ़ना

जब किसी बादशाह या दुश्मन का खौफ और डर हो तो सूरह यासीन के पढ़ने से डर और खौफ जाता रहता है ।


मुश्किल या मुसीबत के वक़्त सूरह यासीन का पढ़ना

सूरह यासीन का किसी भी मुश्किल में या मुसीबत के वक़्त पढ़ना बहुत मुजर्रब है, इससे तकलीफें दूर होती है ।


सूरह यासीन का एक बार में 41 बार पढ़ना

सूरह यासीन एक बार में 41 बार पढ़ने से बड़ी बड़ी मुश्किलात दूर हो जाती है । जैसे, जेल से रिहाई और बच्ची की शादी वग़ैरह !

सब से बेहतर तो ये है कि सूरह यासीन को रोजाना की अपनी ज़िन्दगी में शामिल किया जाये ताकि हमारी ज़िन्दगी में बरकत हासिल हो जिसकी हमें सख्त ज़रुरत है । सवाब के लिए भी सूरह यासीन पढ़ना चाहिए । बरकतें खुद-ब-खुद हासिल होंगी [इंशा अल्लाह]

 

Hadith Related To Surah Yaseen In Hindi


Surah Yasin Sharif Benefits Hindi Mein


दोस्तों सूरह यासीन की बेहतर जानकारी के लिए नीचे कुछ रिवायात दिए गए हैं जिससे आपको सुरह यासीन की खासियत का भी पता चलेगा 👇👇👇


हदीस (Hadees) 01

हजरत आईशा (रजि.) से रिवायत है कि हजरत मुहम्मद मुस्तफा (स.अ.व.) ने फरमाया कि कुरआन में एक सूरह है जो बड़ी अज़मत वाली है । जो भी इस सूरह को पढ़ेगा अल्लाह उसको शरीफ के “लकब़” से नवाजेगा । रबी और मुज़र की तादाद से भी ज्यादा अफराद के लिए इस सूरह के पढ़ने वाले की शफाअत कबुल की जाएगी । इस अजमत वाली सूरह का नाम सूरह यासीन (Yaseen) है ।


( रबी और मुज़र अरब के दो मशहूर कबीले थे और उन से ताल्लुक रखने वाले अफराद की तादाद बहुत ज्यादा थी। )


हदीस (Hadees) 02

हजरत अनस (रजि.) हुजूरे पाक से रिवायत करते हैं कि हर चीज़ का एक दिल होता है। कुरआन का दिल सूरह यासीन (Yaseen) है । जो सूरह यासीन (Yaseen) पढ़ेगा उस की किरात (केरत) के वजह से उसे दस बार कुरआन मजीद पढ़ने/पढ़ाने का सवाब मिलेगा। इसकी रिवायत तिर्मज़ी में भी है ।


हदीस (Hadees) 03

हुजूरे पाक (स.अ.व) ने फरमाया कि जो शख्स अल्लाह की रज़ामन्दी के लिए सूरह यासीन (Yaseen) पढ़ेगा उस के पहले गुनाह माफ कर दिए जाएंगे । लिहाज़ा इस सूरह को मरने वालों के पास पढ़ना बहुत मुफीद (फायदेमन्द) है ।


हदीस (Hadees) 04

हुजूरे पाक (स.अ.व) ने फरमाया कि जिस ने रात के वक्त सूरह यासीन (Yaseen) पढ़ी । उस हालत में जब वह सुबह उठेगा तो वह बख्शा हुआ होगा । (तफसीर- इब्ने कसीर)


हदीस (Hadees) 05

हजरत इब्ने अब्बास (रजि.) से रिवायत है कि हुजूरे पाक (स.अ.व) ने फरमाया के मेरी ये तमन्ना है कि ये सूरह (सूरह यासीन) हर उम्मती के दिल में हो ।

(तफसीर इब्ने कसीर)


हदीस (Hadees) 06

हजरत अता बिन रब्बाह तबी से मरवी है के मुझे ये हदीस पहुँची के जो आदमी दिन के आगाज़ (शुरूआत) में सूरह यासीन (Yaseen) शरीफ पढ़ेगा उस की तमाम जरुरियात पूरी कर दी जाएगी ।


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दोस्तों उम्मीद है कि सूरह यासीन (Surah Yaseen) का यह पोस्ट आपको पसंद आया होगा । इस पोस्ट को अपने दूसरे दोस्तों को भी सदका-ए-ज़ारिया की नियत से जरूर शेयर कीजिए । और उन्हें भी शेयर कीजिए जो सूरह यासीन (Surah Yaseen) नहीं जानते । हम आपसे फिर मिलेंगे अगले पोस्ट में तबतक के लिए अल्लाह हाफिज़ !
Surah been in Hindi & Urdu & English

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